Last seen: Mar 5, 2026
कई बार बाजार में 5-10% तक का करेक्शन एक सामान्य प्रक्रिया माना जाता है। इससे कमजोर निवेशक बाहर निकलते हैं और मजबूत कंपनियों में निवेश के नए अवसर मिलते...
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट स्थायी नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत ग्रोथ, डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर...
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ने और ...
2026 की शुरुआत में भारतीय शेयर बाजार में काफी अस्थिरता देखने को मिली है। हाल ही में प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty में तेज गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य...
लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए आज का बाजार संभवतः चिंता का विषय हो सकता है; उन्हें मजबूत आधार वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए और पैनिक सेल से बचना चाहिए।
निवेशक आज शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए संभावित शेयरों को चुन सकते हैं, लेकिन हमेशा स्टॉप-लॉस और जोखिम सीमा तय करें, जैसा ब्रोकरेज ने सुझाया है।
निफ्टी भी सुबह कमजोर खुला और पूरे दिन लाल निशान में रहा, जिससे पता चलता है कि बाजार की शुरुआत से ही दबाव था।
सेंसेक्स आज 78,543 के स्तर पर खुला, जो पिछले बंद स्तर से काफी नीचे था। इससे दबाव और निवेशकों की बेचैनी दिखी।
बाजार वॉल्यूम गिरावट के समय मंदा संकेत देता है, जिससे निवेशकों का मनोबल प्रभावित होता है और वे जोखिम-प्रेमी निर्णयों के बजाय सुरक्षित निवेश करते हैं।
जब बाजार में वॉल्यूम और गिरते शेयरों की संख्या दोनों बढ़ते हैं, तो इसका मतलब है कि व्यापक स्तर पर बेचवाली है और बाजार दबाव में है। आज ऐसा ही रुझान था।
सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग जोखिम से बचने का एक प्रमुख तरीका है, और आज के सत्र में यह रुझान स्पष्ट रूप से दिखा।
