हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। वैश्विक तनाव, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में दबाव बना है। निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या यह गिरावट लंबी चलेगी या यह केवल अस्थायी करेक्शन है।
2026 की शुरुआत में भारतीय शेयर बाजार में काफी अस्थिरता देखने को मिली है। हाल ही में प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty में तेज गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी माना जा रहा है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने का डर रहता है। यही कारण है कि विदेशी निवेशक कई बार जोखिम कम करने के लिए भारतीय बाजार से पैसा निकाल लेते हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट स्थायी नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत ग्रोथ, डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बाजार को लंबी अवधि में सपोर्ट देते हैं।
कई बार बाजार में 5-10% तक का करेक्शन एक सामान्य प्रक्रिया माना जाता है। इससे कमजोर निवेशक बाहर निकलते हैं और मजबूत कंपनियों में निवेश के नए अवसर मिलते हैं।
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है कि वे घबराहट में फैसले न लें। लंबी अवधि के निवेशक अच्छे फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश जारी रख सकते हैं और बाजार गिरने पर SIP या चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपना सकते हैं।
