आज विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली का असर बाजार पर स्पष्ट दिखाई दिया। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं तो बाजार में दबाव बढ़ता है। इससे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आती है और निवेशकों का मनोबल कमजोर होता है। घरेलू निवेशकों ने कुछ हद तक समर्थन दिया, लेकिन कुल मिलाकर बाजार दबाव में रहा।
विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब वे बिकवाली करते हैं तो बाजार में तरलता कम हो जाती है और सूचकांक नीचे जा सकते हैं। आज भी इसी तरह की स्थिति देखी गई, जहां वैश्विक अनिश्चितता के कारण FII ने निवेश घटाया।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) अक्सर ऐसे समय में बाजार को सहारा देते हैं। यदि भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत रहती है, तो लंबी अवधि में विदेशी निवेश फिर लौट सकता है। निवेशकों को केवल FII गतिविधि के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि कंपनी के मूलभूत आधार और आर्थिक संकेतकों को भी देखना चाहिए।
